The whole globe has presently, received deluded about his self-consciousness. As his eyesight has obtained dazzled by the exterior glitz and glamour, he has lost the identity of the truth. This id disaster is the foundation cause of all the trouble stress, criminal offense, violence, communalism, terrorism and theft on the planet. Man is trying to escape from himself. The expanding relevance of ostentation in worship signifies this tendency of escapism. The religion propounded because of the descendants of Abraham continues to be regarding their strife for augmenting their political hegemony and numerical preponderance, being a battle for Dharma and shading human blood for the previous few hundreds of years.

दुःख दो , न दुःख लो          शुक्रिया बाबा शुक्रिया, आपका लाख लाख पद्मगुना

Very like pushing oneself to finish a long race Regardless of the agony and exhaustion, you can make use of willpower

எண்ண சக்தியை துஷ்பிரயோகம் செய்யாதீர்கள், உபயோகியுங்கள் –

टीचर्स को त्याग और तपस्या तो सदा ही याद है ना? किसी भी व्यक्ति या वैभव के आकर्षण में न आयें। नहीं तो यह भी एक बन्धन हो जाता है - कर्मातीत बनने में। तो टीचर्स अपने आपके पुरूषार्थ में सन्तुष्ट है? चढ़ती कला की महसूसता होती है? सबसे सन्तुष्ट हो सभी? अपने पुरूषार्थ से, सेवा से फिर साथियों में, सबसे सन्तुष्ट? सबके सर्टिफिकेट होने चाहिए ना? तो सभी सर्टिफिकेट हैं - क्या समझती हो? अगर आप सच्चाई से और सफाई से सन्तुष्ट हैं तो बाप भी सन्तुष्ट है। एक होता है वैसे ही कहना कि सन्तुष्ट हैं, एक होता है सच्चाई-सफाई से कहना कि सन्तुष्ट हैं। सदा सन्तुष्ट!

से अशोक वाटिका में जानेवाले, सुख और शान्ति के

Utterance of such mantras induces good frequencies within the surrounding and permits us to determine a co-relation with the cosmic environment and our interior self. There positive vibrations make the environment pure, serene and self-contained, and in some cases purify our thoughts, human body and internal soul.

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Not Absolutely everyone who stands agency on The idea of a rational and even correct conclusion has self-mastery. Stubborn men and women are literally more like an individual without self-mastery, because they are partly led by the pleasure coming from victory.

....... जला रही हूँ ...... भस्म कर रही हूँ ......  मैं आत्मा महारथी महावीर .... नाराज़ होना, असंतुष्ट  रहना....के  मायावी संस्कार पर विजयी रूहानी सेनानी हूँ .......... मैं आत्मा संतुष्टमणि  हूँ.....मैं देही -अभिमानी ..... आत्म-अभिमानी..... रूहानी अभिमानी .....परमात्म अभिमानी..... परमात्म ज्ञानी ..... परमात्म check here भाग्यवान..... सर्वगुण सम्पन्न  ..... सोला  कला सम्पूर्ण ..... सम्पूर्ण निर्विकारी .....मर्यादा पुरुषोत्तम  ...... डबल अहिंसक  हूँ ..... डबल ताजधारी ..... विष्व  का मालिक हूँ ..... मैं आत्मा ताजधारी ..... तख़्तधारी ..... तिलकधारी ..... दिलतक्खनशीन  ..... डबललाइट ..... सूर्यवंशी शूरवीर ....... महाबली महाबलवान ..... बाहुबलि पहलवान ....... अष्ट भुजाधारी अष्ट शक्तिधारी   अस्त्र शस्त्रधारी शिवमई शक्ति हूँ .....  

Payot asserts that genius is, earlier mentioned all, a lengthy technique of tolerance: scientific and literary works that honour human talent essentially the most are by no means a result of the superiority of intelligence, like it is mostly considered, but more info as an alternative for the superiority of the willpower that is definitely admirably owner of by itself.

ऐसे हर सेकेण्ड पुण्य की पूंजी जमा करो। हर सेकेण्ड हर संकल्प की वैल्यू को जान, संकल्प और सेकेण्ड को यूज करो। जो कार्य आज के अनेक पदमपति नहीं कर सकते वह आपका एक संकल्प आत्मा को पदमापदमपति बना सकता है। तो आपके संकल्प की शक्ति कितनी श्रेष्ठ है। चाहे जमा करो और कराओ, चाहे व्यर्थ गँवाओ, यह आपके ऊपर है। गँवाने वाले को पश्चाताप करना पड़ेगा। जमा करने वाले सर्व प्राप्तियों के झूले में झूलेंगे। कभी सुख के झूले में, कभी शान्ति के झूले में, कभी आनन्द के झूले में। और गँवाने वाले झूले में झूलने वालों को देख अपनी झोली को देखते रहेंगे। आप सब तो झूलने वाले हो ना।

मैं आत्मा परमधाम शान्तिधाम शिवालय में हूँ ....... शिवबाबा के साथ हूँ ..... समीप हूँ .... समान हूँ ..... सम्मुख हूँ .....  सेफ हूँ ..... बाप की छत्रछाया में हूँ .....अष्ट इष्ट महान सर्व श्रेष्ठ हूँ ...... मैं आत्मा मास्टर ज्ञानसूर्य हूँ .... मास्टर रचयिता हूँ ..... मास्टर महाकाल हूँ ..... मास्टर सर्व शक्तिवान हूँ ..... शिव शक्ति कमबाइनड  हूँ  ........ अकालतक्खनशीन  हूँ ....अकालमूर्त हूँ ..... अचल अडोल अंगद एकरस एकटिक एकाग्र स्थिरियम अथक और बीजरूप  हूँ ........ शक्तिमूर्त ..... संहारनीमूर्त ...... अलंकारीमूर्त ..... कल्याणीमूर्त हूँ ......शक्ति सेना हूँ ..... शक्तिदल हूँ ...... सर्वशक्तिमान हूँ ......  रुहे गुलाब .... जलतीज्वाला .... ज्वालामुखी ....  ज्वालास्वरूप .... ज्वालाअग्नि हूँ .... नाराज़ होना, असंतुष्ट  रहना........अवगुणों का आसुरी संस्कार का अग्नि संस्कार कर रही हूँ .

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